नई दिल्ली हमारे वैज्ञानिकों ने सालों में हासिल किए जाने वाले लक्ष्य की अवधि को अपनी अथक मेहनत से महीनों में बदल दिया है। उनके दृढ़निश्चय से ही कोरोना के इलाज और वैक्सीन की तलाश ह्यूमन ट्रायल के चरण तक पहुंच गई है। इलाज चार से पांच माह में मिलने की उम्मीद जग गई है। हालांकि तब तक कोरोना और धरती के भगवानों के बीच जंग जारी रहेगी। इस जंग में हम और आप महज शारीरिक दूरी के सिद्धांत व साफ-सफाई के काम को अंजाम देकर अपना योगदान दे सकते हैं।
आपातकाल में ऐतिहासिक फैसले
सामान्य परिस्थिति में साधारण फैसले लिए जाते हैं और असामान्य में ऐतिहासिक फैसले किए जाते हैं। सामान्य परिस्थिति में किसी रोग का इलाज या वैक्सीन खोजने में वर्षों बरस लग जाते हैं। टीबी हो या एचआइवी या फिर जेई हमने दो से चार दशक की मेहनत के बाद ही इनकी वैक्सीन खोजी। पश्चिमी देशों में सरकारों और गैर लाभकारी संगठनों की मदद से कंपनियों ने फुर्ती दिखाई और अपने तमाम संसाधन इस ओर लगा दिए।
बढ़ा दिए हैं पुख्ता कदम
दुनिया की सबसे बड़ी बायोटेक कंपनी नोवेक्स ने मई के दूसरे पखवाड़े में ऑस्ट्रेलिया में ह्यूमन ट्रायल शुरू करने की घोषणा की है। अमेरिका के मैरीलैंड स्थित कंपनी के शोधकर्ताओं ने विश्वास जताया कि इम्यून सिस्टम पर उसकी दवा ने लैब में किए गए परीक्षणों और जानवरों पर शानदार असर दिखाया है। इस दवा से ऐसे एंटीबॉडी पैदा करने में मदद मिली। उम्मीद है कि उसकी दवा साल के अंत तक बाजार में आ जाएगी।
न रह जाए कोई कसर
स्टेम सेल थैरेपी पर काम कर रही अमेरिकी कंपनी मेसोब्लास्ट ने भी घोषणा कर दी है कि वह 240 मानवों पर अपनी दवा का ट्रायल करेगी। उसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआइएच) का साथ भी मिल गया है। कंपनी ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों में पैदा होने वाले इम्युन रिएक्शन (रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण पैदा होने वाली दिक्कतों) का इलाज सफलतापूर्वक खोजा है।
मोडेरना ने शुरू किए ट्रायल
मोडेरना ने क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिए हैं। इनोवियो ने दवा का पहला डोज एक वॉलिंटियर को दिया है। जॉनसन एंड जॉनसन सितंबर से ह्यूमन ट्रायल शुरू करने की घोषणा की है। बेयलर कॉलेज ऑफ मेडिसन ने भी वैक्सीन में सफलता का एलान किया है, जिसे अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनेस्ट्रेशन से इजाजत का इंतजार है।
लॉकडाउन के पक्ष और विपक्ष में तर्क
हर कोई अपने हिसाब से लॉकडाउन के पक्ष और विपक्ष में तर्क देता सुना जा सकता है। इन सबके बीच कुछ राज्य सरकारों और विशेषज्ञों ने केंद्र सरकार को इसे बढ़ाने के लिए कहा है। लॉकडाउन उठाने के लिए सही समय क्या हो सकता है, इसके लिए कुछ दुओं पर विचार के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। आइए इन पर गौर करें।
तो बीमारी महामारी नहीं बन सकती
यदि हमारे पास टीका है तो यदि हम आबादी के करीब 60 फीसद हिस्से का टीकाकरण करने में कामयाब हो जाएं तो बीमारी महामारी नहीं बन सकती। टीके में 12 से 18 महीने लग सकते हैं। इसलिए लॉकडाउन में रहने के लिए यह बहुत लंबी अवधि है।
वायरस से प्रतिरक्षा
जब पर्याप्त लोगों में हो प्रतिरक्षा वायरस पर्याप्त लोगों को संक्रमित करता है, जो फिर ठीक हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में उनमें खुद ब खुद प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है। लेकिन भीड़ की प्रतिरक्षा को बनने में ही सालों लग सकते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह विचार काम करेगा या नहीं। अन्य कोरोना वायरस पुनरावृत्ति करने के लिए जाने जाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन
जब हमारे पास योजना हो विश्व स्वास्थ्य संगठन के महासचिव टेड्रोस ऐडहेनॉम गेब्रीयेसोस के अनुसार संक्रमण को रोकने और जीवन बचाने के लिए अधिक सटीक और लक्षित उपाय आवश्यक है। जब हम तैयार हों 14 दिनों के लिए मामलों में निरंतर कमी, रोगियों के इलाज में सक्षमता, लक्षण वालों और उनके संपर्कों के परीक्षण व निगरानी में समर्थ हों।